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भारत में और उसके बाहर खनन, ऊर्जा और उससे संबंधित उद्योगों में प्रयोग के लिए कोयला एवं खनिजों पर विश्बसनीय, उच्च गुणवत्ता वाला अन्तरराष्ट्रीय स्तर का प्रतिस्पर्द्धात्मक अनुसंधान व विकास करना तथा योजना बनाना.
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खान से बाजार तक सम्पूर्ण श्रृंखला को सम्मिलित करते हुए अति आवश्यक तकनीकी जानकारी एवं अनुसंधान व विकास सेवा के साथ सामान्यतः खनन उद्योग एवं विशेषतः कोयला उद्योग को सहायता देना.
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विद्युत, इस्पात, रासायनिक फीडस्टाक एवं तरल ईंधन के निमित्त संसाधन संरक्षण, कोयला गुणवत्ता उत्क्रमण एवं कोयला प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी कार्यक्रम पर विशेष ध्यान देते हुए क्लीन कोल इनिसिएटीव को उच्च प्राथमिकता देना.
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देश में अपेक्षित अधिक क्षमता वाले मानव संसाधन (वैज्ञानिक, अभियंता, तकनीशियन आदि) को जुटाने में सहायता देना.
¨ खनन एवं ईंधन के क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों के प्रबंधन को सरल बनाने के
लिए केंद्रीय एवं प्रांतीय सरकार को उच्च गुणवत्ता युक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सलाह देना.
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11 वीं पंचवर्षीय योजना से प्रारंभ प्रत्येक पांच वर्षों में कम से कम
25 अन्तरराष्ट्रीय पेटेन्ट दायर करना. |