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परिष्कृत
कोयले
का
प्रारंभन.
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कोयले में पाए जाने वाली धूल को हटाने के लिए खनन प्रारंभन में नवीनता लाना.
· स्वस्थाने कोयले की पारगम्यता, गहरी कोयला खदानों में CO2
को अलग करने के लिए शोषण व्यवहार एवं गैस विसरण अभिलक्षणों के संबंध में डैटा बैंक तैयार करना.
· कोयले की गुणवत्ता को उत्क्रमित करने के लिए अपेक्षित उच्च स्तरीय तकनीक एवं शुष्क तथा नम परिष्करण पद्धति.
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परिष्कृत कोयले के प्रयोग से अधिष्ठापित क्षमता से अधिक विद्युत पैदा करने के लिए विद्युत उत्पादन करने की प्रभावकारिता में सुधार लाना तथा और अधिक दक्ष ऊर्जा उत्पादन चक्र के साथ-साथ सह-उत्पादन प्रणालियों एवं प्रायः शून्य उत्सर्जन करने वाली प्रौद्योगिकियों के
संवर्धन का सहारा लेना.
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विद्युत, रासायनिक फीडस्टाक तथा तरल ईंधन के उत्पादन हेतु अधिक छाई वाले भारतीय कोयले का गैसीकरण.
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बायोमास से सह-प्रदहन/सह-गैसीकरण.
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आक्सीजन युक्त ईंधन का प्रदहन तथा प्रदहनोत्तर उपलब्धि.
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विनिर्दिष्ट श्रेणी की तरह ईंधनों के उत्पादन के लिए अतिगंधक युक्त भारतीय कोयले (पूर्वोत्तर क्षेत्र) का प्रत्यक्ष द्रवीकरण.
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विभिन्न उद्योगों के लिए पूर्वोत्तर कोयले का उपयोग.
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निम्न स्तरीय कोयले से इस्पात निर्माण एवं अन्य धातुकर्म प्रयोजन के लिए बेहतर स्वदेशी अपचायक का संवर्धन.
· ऊर्जा दक्ष कोक ओवन एवं अवशिष्ट ताप से विद्युत उत्पादन के लिए अभिकल्प एवं विकास.
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विभिन्न विनिर्देशन वाले कोयला आधारित मूल्य वर्द्धित कार्बनों का विकास.
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कोयला या कार्बनिक अवशिष्टों को सिन्थेटिक ईंधन एवं अन्य रसायनों/फीडस्टाकों में परिवर्तन करते हुए पेट्रोलियम फीडस्टाकों पर निर्भर होना.
· कोयला उत्पादन करने वाले उद्योगों के सहयोग से संसाधन गुणवत्ता मूल्यांकन हेतु राष्ट्रीय कार्य को जारी रखना.
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