महत्वपूर्ण अनुसंधान विकास क्षेत्र

प्रोद्योगिकी उत्क्रमण 

q  मोटी और/या खड़ी परत का पूरी सुरक्षा के साथ कम खर्च पर उत्खनन के लिए भूमिगत खनन में अत्यधिक उत्पादन करने की प्रौद्योगिकी का विकास एवं अनुकूलन.

q  खनन समस्याओं के संबंध में संख्यात्मक प्रणालियों के अनुप्रयोग के लिए उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना करना.

q  कोयला शैलिकी के लिए उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना करना.

q  समुद्र तटीय प्लेसर खनन

 खान सुरक्षा 

·       गैस और आग का मानीटरन.

·       भारतीय खानों के लिए बिना तार वाले मल्टीमिडिया संचार का विकास.

·       कठिन एवं जोखिम भरी स्थितियों में रोबोट्स का प्रयोग.

·       पुराने एवं अगम्य कार्यस्थलों का पता लगाना एवं उनका मानचित्र बनाना तथा अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करना

·       विशेष रूप से भूमिगत खानों में आपदा प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक समर्थन उपलब्ध करना. 

Ø तापमान में हुई वृद्धि का शीघ्र पता लगाना.

Ø खानों में वाटर बोडीज का पता लगाकर उनका सीमांकन करना.

Ø नाका का मूल्यांकन करने के लिए भूवेधन रडार का प्रयोग करना.

Ø फंसे हुए खनिकों के स्थान का पता लगाने के लिए प्रौद्योगिकी का विकास करना.

Ø सुरक्षा चेम्बरों, जहां खनिक पनाह ले सकते हैं, का अभिकल्प एवं अधिष्ठापन

 पर्यावरण मुद्दे 

¨    उड़नशील राख का प्रयोग एवं निपटान.

¨    खनन संचालन का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रक्षेपित करने के लिए संख्यात्मक-सह-सांख्यिकीय प्रतिरूप का विकास करना.

¨    खनन क्षेत्रों में जल छाजन प्रबंधन.

 उपस्कर का प्रयोग 

खान थम्हालों एवं खान उपस्करों तथा अन्यान्य संयंत्रों एवं प्रसंस्करण उपस्करों के    अभिकल्प एवं विकास के लिए एक केंद्र स्थापित करना.

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत 

§  कोयला तल मिथेन (CBM)

§  भूमिगत कोयला गैसीकरण (UCG)

सुरंग निर्माण एवं भूमिगत कंदराओं के लिए भूमि नियंत्रण प्रौद्योगिकी.

पोखरिया खदानों में ढलान स्थिरता इष्टतमीकृत करना.

 परिष्कृत कोयले का प्रारंभन. 

·       कोयले में पाए जाने वाली धूल को हटाने के लिए खनन प्रारंभन में नवीनता लाना.

·       स्वस्थाने कोयले की पारगम्यता, गहरी कोयला खदानों में CO2  को अलग करने  के लिए शोषण व्यवहार एवं गैस विसरण अभिलक्षणों के संबंध में डैटा बैंक तैयार करना.

·       कोयले की गुणवत्ता को उत्क्रमित करने के लिए अपेक्षित उच्च स्तरीय तकनीक एवं शुष्क तथा नम परिष्करण पद्धति.

·       परिष्कृत कोयले के प्रयोग से अधिष्ठापित क्षमता से अधिक विद्युत पैदा करने के लिए विद्युत उत्पादन करने की प्रभावकारिता में सुधार लाना तथा और अधिक दक्ष ऊर्जा उत्पादन चक्र के साथ-साथ सह-उत्पादन प्रणालियों एवं प्रायः शून्य उत्सर्जन करने वाली प्रौद्योगिकियों के  संवर्धन का सहारा लेना.

·       विद्युत, रासायनिक फीडस्टाक तथा तरल ईंधन के उत्पादन हेतु अधिक छाई वाले भारतीय कोयले का गैसीकरण.

·       बायोमास से सह-प्रदहन/सह-गैसीकरण.

·       आक्सीजन युक्त ईंधन का प्रदहन तथा प्रदहनोत्तर उपलब्धि.

·       विनिर्दिष्ट श्रेणी की तरह ईंधनों के उत्पादन के लिए अतिगंधक युक्त भारतीय कोयले (पूर्वोत्तर क्षेत्र) का प्रत्यक्ष द्रवीकरण.

·       विभिन्न उद्योगों के लिए पूर्वोत्तर कोयले का उपयोग.

·       निम्न स्तरीय कोयले से इस्पात निर्माण एवं अन्य धातुकर्म प्रयोजन के लिए बेहतर स्वदेशी अपचायक का संवर्धन.

·       ऊर्जा दक्ष कोक ओवन एवं अवशिष्ट ताप से विद्युत उत्पादन के लिए अभिकल्प एवं विकास.

·       विभिन्न विनिर्देशन वाले कोयला आधारित मूल्य वर्द्धित कार्बनों का विकास.

·       कोयला या कार्बनिक अवशिष्टों को सिन्थेटिक ईंधन एवं अन्य रसायनों/फीडस्टाकों में परिवर्तन करते हुए पेट्रोलियम फीडस्टाकों पर निर्भर होना.

·       कोयला उत्पादन करने वाले उद्योगों के सहयोग से संसाधन गुणवत्ता मूल्यांकन हेतु राष्ट्रीय कार्य को जारी रखना.

सामाजिक उद्देश्य 

·       खदान से निकाले गए जल का सामुदायिक उपयोग.

·       खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास.